“सफलता आपकी सोच में है।”

"सफल लोग हर पल स्वचिंतन, स्वदर्शन एवं स्वमंथन करते है। लेकिन असफल लोग हमेशा परचिन्तन, प्रदर्शन एवं मंथन करते है। जरा सोचिये आज आप क्या करते है?"                   

सफलता आपकी सोच में है। अगर आपने यह जान लिया कि सफलता आपकी सोच में है तो आप अपने जीवन में किसी भी तरह की छोटी-बड़ी सफलताएं आसानी से प्राप्त कर सकते है। इसके पीछे कारण क्या है? कि सोंच वो रहस्य है। जिस रहस्य को बड़े-बड़े महान इंसानो ने समझा और अपनी सोंच को सही दिशा में सोचने के लिए मजबूर किया और मेहनत किया। चाहे वो आइंस्टाइन हो, न्यूटन हो, हाप्सला, रूसो, प्लेटो यहाँ तक कि ओशो और बड़े-बड़े संतो ने ये किया। अगर आज कोई अमीर है, सफल है, महान है, सुखी जीवन जी रहा है, स्वस्थ है और उसके संपर्क के करोडो लोग, हज़ारों लोग, लाखों लोग आते है और उससे ढेर सारा ज्ञान प्राप्त करते है, समाधान प्राप्त करते है, अपनी समस्याओं को सुलझाते है और अपने जीवन में सुख-शान्ति, समृद्धि बढ़ाते है। तो उसके पीछे सिर्फ यही एक शक्ति काम करती है। और वो शक्ति है आपके भीतर की सोंच और ये सोंच हर किसी के अंदर है। जितने भी मनुष्य के रूप में प्राणी है। उन सभी के पास सोंच रूपी शक्ति है।

सोंच की शक्ति है। क्या आप अपनी इस सोंच की शक्ति को सही दिशा में लगाना चाहते है ? या इसको सही तरीके से यूज करना चाहते है ? अगर हाँ तो आज से आप अपनी सोंच पर काम करना शुरू कीजिये। सोंचिये कि आप हर दिन जो काम करते है वो काम सही है या गलत है। सोचिये। सोचिये कि जब आप निर्णय लेते है तो वह सही है या गलत है। निर्णय क्या आपकी ईमानदारी, भलाई की बुनियाद पर ली जाती है ? या सिर्फ अपने फायदे के लिए या अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए। अगर आप अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए निर्णय ले रहे है। तो आप गलत है यानी कि अपनी सोच को गलत दिशा में लगा रहे है। अगर आप भलाई की भावना से, सच्चाई से, ईमानदारी से और सच की बुनियाद पर रहकर कोई भी निर्णय ले रहे है तो वो निर्णय सही होगा आपकी सोच सही होगी। इसका मतलब ये है कि आप अपनी सोच को सही दिशा में लगा रहे है। इस्तेमाल कर रहे है। तो देर किस बात की है।

दोस्तों, हर कोई कहता है मेरी सोच अच्छी है, उनकी सोच ख़राब है या मेरी सोच ही अच्छी नहीं औरो की सोच अच्छी है। ऐसा भी कहने वाले लोग है क्योंकि वो जानते है कि हर काम हर परिणाम, हर फल जो भी प्राप्त होता वो सब हमारी सोच का परिणाम होता है। तो क्या आप अपनी जिंदगी में खुद के लिए कुछ अच्छा चाहते है ? हाँ अच्छा चाहतें है, हम सभी यही चाहते है। तो क्या आप वैसा करते हो, जैसा आप चाहते हो। अगर आप अच्छा बनना चाहते है, अच्छे लोगो के साथ जिंदगी गुज़ारना चाहते है, ऊंचाई पर पहुंचना चाहते है तो क्या आप सच में अच्छे लोगो के साथ रहते है ? आप अच्छे लोगो के संपर्क में है ? आप अच्छे लोगो के साथ संपर्क बनाते है ?या बस यूँ ही, नॉर्मल , नॉर्मल से नीचे लोगो के साथ रहते है, दोस्ती करते है। तो आप नॉर्मल, नॉर्मल से नीचे लोगो के साथ बने रह जायेंगे। तो आपकी सोच है कि आपके आस-पास के लोग कैसे हो? अच्छे , ऊँचे , महान , अमीर ,सफल। तो ये आपकी सोच है। अगर गरीब, नकारे, निकम्मे, नकरात्मक विचारक आपके संपर्क में है तो इसका मतलब ये है कि ये भी आपकी नकारात्मक सोच का परिणाम है।

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