सकारात्मकता के साथ अपने जीवन को सुपरचार्ज करने के 7 शक्तिशाली तरीके (7 Powerful Ways to Supercharge Your Life With Positivity)

सकारात्मकता के साथ अपने जीवन को सुपरचार्ज करने के 7 शक्तिशाली तरीके (7 Powerful Ways to Supercharge Your Life With Positivity)

1. सोचना और धन्यवाद देना (Think and thank you)

आप ईश्वर की दी हुई नियामतों के विषय में बार-बार सोचिये और आज तक की प्राप्त उपलब्धयों को गिनिए कि जो कुछ आपको मिला है , वह कैसे और कहाँ से मिला है। जब आप यह समझकर हर वस्तु को धन्यवाद कृतग्यता प्रकट करेंगे तब आपके कार्यों और प्राप्तियों में निखार आएगा। आप हर उस व्यक्ति को धन्यवाद का पत्र लिखे जिन्होंने जाने अनजाने में आपके कार्यों में मदद की है। आपके भीतर जो उत्साह और विश्वास की वृद्धि होगी वह आपको कई गुना ऊँचा उठाकर श्रेष्ठ श्रेणी में पंहुचा देगी। आप स्वयं के विषय में जितना विचार करेंगे, आप अपने भीतर अनमोल ख़ज़ानों को देखने की शक्ति एकत्रित कर पाने में सफल होंगे।

2. ढृढ़ निष्चय होकर निर्णय ले (Be firm and decide)

आपका एक निर्णय आपको आपके सपने से दूर कर सकता है और वहां तक पंहुचा सकता है, उन दोनों परिणामों के जिम्मेदार मात्र आप है। क्या आपको स्वयं और ईश्वर पर भरोसा नहीं है कि उसकी योजनाओं पर चलने की बजाय किसी आसान मार्ग पर चलने का प्रलोभन से आकर्षित हो रहे है, फिर तो थोड़े समय बाद समझ जायेंगे की आप गलत रास्ते पर चल पड़े है तो क्या हुआ जो भविष्य के विषय में स्वयं को वर्तमान स्वरुप को डाल कर उस पर सूक्ष्म दृश्टिकोण से विश्लेषण कर ले, कहीं ऐसा तो नहीं आपकी इच्छाओ के विरोध में आपके कुछ विचार टकरा रहे है। एक लक्ष्य एक मार्ग के सिद्धांत पर चलने वालों को ही महानतम सफलता मिलती है। मार्ग में आये अग्निकुंड को देखकर वापस लौटने वाले कभी मंजिल पर नहीं पहुंच पाते, सफलता उन्हें मिलती है जो वीरता और धैर्य का दामन पकड़ रहेत है। और उस अग्निकुंड को एक छलांग में पार कर जाते है।

3. परिवर्तन को स्वीकारें (Accept The Change)

मनुष्य का स्वभाव है कि वह अपने भविष्य के परिणामो को अच्छा देखना चाहता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या आज को अच्छी तरह व्यतीत करना जनता है ? आप हर छण अच्छे या बुरे फल की कामना लिए आज के पलों में निरंतर बीज बोने का कार्य कर रहे है। यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप कैसे बीज बो रहे है ? क्योंकि आपके जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होने वाला है वह उसी का फल है। उत्तम फल की प्राप्ति उत्तम बीज से ही हो सकती है। इसलिए समय के साथ अपने बीजों में परिवर्तन करें फिर आपको जो-जो परिणाम प्राप्त होंगे वे सब आपकी जीवन की दिशा बदलकर नई दुनिया में पंहुचा देंगे। अथार्त आपके अपने की पहचान करा देंगे। जरुरत है मात्र थोड़े-सी हिम्मत की, ईश्वर पर विश्वास की स्वयं पर भरोसे की। यदि आप अपने भीतर की प्रतिभाओ को पहचानने की क्षमता रखते है। तब आप हर तरफ शक्तियों को महसूस करेंगे। अपने विचारों में जितने भी बदलाव आ रहे है उन्हें खुस होकर स्वीकारें, चमत्कारिक, परिणाम देखकर आप हैरान रह जायेंगे अथार्त आप जो चाहोगे आपको मिल जायेगा।

4.जो भी करे दिल से करें (Do whatever you want from the heart)

आप जो भी कार्य करेनेग, उसमे पवित्रता होनी चाहिए क्योंकि परोपकार की भावना के लिए लिया गया हर कार्य पवित्र होता है। और पवित्र भावना से किये गए हर कार्य का परिणाम १०० गुना फलित होता है। किसी की मदद करते समय दिल से करें। जो आपके दिल में हो वही करे। क्योंकि झूट के पाँव लम्बे नहीं होते। आप कुछ भी ऐसा करे, जिसमे आपके मन को संतुस्ती तथा शान्ति मिले। आपके मन को कभी भी उस कार्य से ख़ुशी नहीं मिल सकती, जिस कार्य से किसी भी एक व्यक्ति या वस्तु को हानि पहुँचती हो और यदि आपका दिल मूल स्रोत जुड़ा हो तो आपके कार्यों में आपको आनंद आएगा और उसकी आनंद में आपको अन्नंत गुना प्राप्तियां होंगी तथा आपकी सफलता निश्चित हो जाएगी।

“मन को पवित्र विचारों से भर लें, धन से आपका जीवन भर जायेगा।”

5. खुद पर विश्वास करे और आगे बढे(Believe in yourself and move on)

आपको खुद के साथ ईश्वर पर पूर्ण विश्वास है। इसलिए आप जानते है कि कोई न कोई आपकी आर्थिक सहायता अवश्य करने वाला है। वह चाहे तो उधार दे सकता है या दान में दे सकता है। इतना तय है कि आपको धन अवश्य मिलेगा। क्योंकि आकर्षण का सिद्धांत आपको धन अवश्य देगा। जब तक आपको आपकी किताबों से धन न मिलने लग जाए, तब तक के लिए समाज के लोगों से धन का सहयोग मिल जायेगा। क्योंकि ईश्वर आपके साथ है, और आपको ईश्वर पर पूरा भरोसा है और ईश्वर ही किसी न किसी के मन में यह विचार डालेगा और वह व्यक्ति आपको धन देगा जिससे आपको ढेर सारा लाभ होगा। अब आप एक विचार यह बताये आपको कितनी धनराशि की आवश्यकता है।

6. अपनी आदतों को बदले (Change your habits)

अपने भीतर से उठने वाले विचारों पर अपनी सोच को केंद्रित करे और जांचे की कौन-सी बातें या कार्य अनुचित है ? जो आपको ऊँचे लोगो की श्रेणी में पहुंचने से रोक रहे है। किसी भी प्रकार की अयोग्यता जिसके कारण आपके विचार कमजोर पड़ रहे है और आपकी शक्तिहीनता प्रकट हो रही है। तब आपको उसे बदलने के लिए आत्म अनुशाषित होकर स्वयं के प्रति शख्त हो जाना चाहिए।
ऊर्जा को व्यर्थ में गवाने से आप बच जायेंगे, क्योंकि एक नकरात्मक विचार भी दस सकारात्मक विचारों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। आपके पैरों में बेड़ियों का अहसास होगा। किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने से आप वंचित रहेंगे। आपकी सोच छोटी पड़ जाएगी। परन्तु जब आप अपनी आदतों को बदल देंगे तब आप तरोताज़ा महसूस करेंगे और वास्तविकता के नजदीक ही नहीं, अपितु सच्चाई के मार्ग पर ही चलना अपना धर्म बना लेंगे।
उसी समय में आप पहले से ज्यादा कार्य में समर्थ हो जाते है। आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होना स्वाभाविक है और विचारों के साथ आपका घनिष्ट सम्बन्ध बन जाता है। आपका व्यवहार शक्ति सम्पन्नता में परिवर्तित हो जाता है। जिससे अनेकों लोगों को लाभ पहुँचता है।

7. आत्म अनुशासित बनें (Be self disciplined)

आप अब तक अनुशासित व्यव्हार नहीं कर सकते। जब तक कि आप आत्म अनुशासन की कला नहीं सीख लेते। आत्म अनुशासन से अपने एकाग्रता की शक्ति का विकास होता है। परिणाम स्वरुप आपकी योग्यता में वृद्धि होती है। आपके स्वभाग्य को चमका रख देता है। अनुशासन शिक्षा प्राप्त करने की पहली सीढ़ी है और शिक्षा वह शक्ति है, जिसके बल पर आप जो चाहे वो प्राप्त कर सकते है। आपके जीवन में कुछ भी परिवर्तन होते है। वे सब ज्ञान के आधार पर ही होता है। आप अपने मन को अनुशासित करके अपनी इन्द्रियों को प्रशिक्षित कर सकते है और उनसे मनचाहा कार्य करवा सकते है।
जब तक आप स्वयं को बदलने के लिए तैयार नहीं हो जाते। तब तक आपको कोई बदल नहीं सकता, आपको ऐसा करने से पहले स्वयं को अनिशासित करना पड़ेगा। आपको आत्मदर्शन के आधार अपने भीतर झांककर उन तत्वों का अवलोकन करना पड़ेगा, जिनकी सहायता से आप अपने तथा ड्सरों के साथ सामंजस्य स्थापित कर पाते है। आप स्वयं में साध्य है और उसकी प्राप्ति के लिए अपने गुणों की परख करना जरुरी हो जाता है।